UPSC की तैयारी करने का सही समय वही होता है जब आप ग्रेजुएशन के सफर में होते हैं, क्योंकि इस टाइम किसी भी स्टूडेंट्स का दिमांग नई चीजों को सीखने के लिए हमेशा तैयार रहता है। अगर आप कॉलेज के साथ ही तैयारी करना शुरू कर देते हैं तो सफलता की राह और अधिक आसान हो जाती है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि “How to Start UPSC Preparation With Graduation ” यानी कि ग्रेजुएशन के दौरान किस तरह से रणनीति बनाएं, कौन से बेसिक स्टेप फॉलो करें और कुछ टॉपर्स के बारे में भी बात करेंगे। अगर आप सच में बड़े सपनों के साथ IAS, IPS और IFS बनना चाहते हैं तो यह ब्लॉग आपके लिए एक महत्वपूर्ण इंफॉर्मेशनल ब्लॉग है।
क्या Graduation के साथ UPSC की Coaching करनी चाहिए? (UPSC Coaching or Self Study, Best Option in College)
Graduation के दौरान UPSC की Coaching करना बिल्कुल सही फैसला हो सकता है क्योंकि इससे आपके तैयारी की नींव मजबूत होती है और समय का सही से उपयोग भी होता है। कॉलेज के साथ कोचिंग लेने से अनुशासन और नियमितता दोनों बनी रहती है। इसके अलावा स्टूडेंट्स को रिवीजन और टेस्ट प्रैक्टिस के लिए पर्याप्त समय भी मिल जाता है। अगर आप पढ़ाई और समय को बैलेंस बनाकर रखना चाहते हैं तो ग्रेजुएशन के साथ ही कोचिंग करना समझदारी का काम है।
Graduation के साथ UPSC की तैयारी करने के फायदे क्या हैं? (Benefits of Starting UPSC Preparation in College)
Graduation के दौरान UPSC की तैयारी करने के बहुत से फायदे होते हैं। नीचे कुछ तथ्य दिए गए हैं जिनके आधार पर आप कल्पना कर सकते हैं:
- समय की बचत: ग्रेजुएशन के साथ तैयारी शुरू करने से डिग्री पूरा होते ही आपका बेसिक सिलेबस भी तैयार हो जाता है।
- कॉन्सेप्ट क्लियरिटी: कॉलेज के सब्जेक्ट जैसे कि History, Geography, Polity etc से आपका बेसिक तैयारी भी होती है।
- कॉन्फिडेंस बिल्डिंग: जल्दी तैयारी शुरू करने से परीक्षा पैटर्न, सिलेबस और उत्तर लेखन की समझ बढ़ती है।
- कंसिस्टेंसी की आदत: कॉलेज के दौरान रोज थोड़ा थोड़ा पढ़ने से निरंतरता बनी रहती है।
- ऑप्शनल सब्जेक्ट का चयन: ग्रेजुएशन के दौरान ही अपने पसंद के हिसाब से ऑप्शनल सब्जेक्ट का चयन कर सकते हैं।
Graduation के साथ UPSC की तैयारी करने का सही रणनीति क्या है? (UPSC Strategy for College Students)
नई शिक्षा नीति के अनुसार अब ग्रेजुएशन 4 साल का हो गया है जिसमें 8 सेमेस्टर हैं। ऐसे में आप निम्न जानकारी के अनुसार अपनी तैयारी और डिग्री दोनों को सफल बना सकते हैं:
1st और 2nd Semester Plan:
शुरुआती दो सेमेस्टर में सिर्फ UPSC और कॉलेज को समझने में ध्यान दें। इसका सिलेबस, परीक्षा पैटर्न, और वैकल्पिक विषय (Optional Subject) को जानें। NCERT से बेसिक क्लियर करें और रोज़ाना नॉर्मली करेंट अफेयर्स पढ़ने की आदत डालें।
3rd और 4th Semester Plan:
अब अपने कमजोर विषयों को पहचानें और उन्हें मजबूत करने पर काम करें। GS Paper 1 से 4 की तैयारी शुरू करें, खासकर इतिहास, भूगोल, और राजनीति जैसे बेसिक विषयों पर फोकस करें।
5th और 6th Semester Plan:
अब समय है गाइडेंस लेने का। किसी अच्छे कोचिंग संस्थान से जुड़ें या ऑनलाइन कोर्स करें। Answer Writing Practice और Test Series में शामिल होकर अपनी तैयारी का मूल्यांकन करें।
7th और 8th Semester Plan:
अब पूरे सिलेबस का रिवीजन करें। Previous Year Papers और Mock Tests देकर अपनी तैयारी को अंतिम रूप दें। बार-बार दोहराव ही सफलता की कुंजी है।
कॉलेज के एग्जाम को लेकर ज्यादा सीरियस नहीं होना है, BA एग्जाम के दो महीने पहले अच्छे से पढ़कर, अच्छे नंबर ला सकते हैं।
इसे भी पढ़ें- Best Coaching in Prayagraj: UPSC, NEET, JEE के लिए प्रयागराज मे कौन सी कोचिंग है बेस्ट, बहोत से बच्चे लेते है गलत बैच।
Graduation के दौरान समय का सही उपयोग कैसे करें? (Time Management Tips for UPSC Aspirants in College)
शुरुआत में जब बच्चे पढ़ने आते हैं तो ज्यादा दोस्ती, कॉलेज फ्रेशर पार्टी और मस्ती में ही समय गंवा देते हैं जबकि यही वक्त सबसे कीमती होता है। अगर आप सच में UPSC की तैयारी Graduation के साथ करना चाहते हैं तो समय का सही से उपयोग करना बहुत जरूरी होता है:
1. रोज़ाना का टाइमटेबल बनाएं: हर दिन 2-3 घंटे सिर्फ UPSC के बेसिक सब्जेक्ट जैसे Polity या History को दें, चाहे कॉलेज में कितना भी बिज़ी क्यों न हो।
2. सोशल मीडिया से दूरी रखें: इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर समय गवाने के बजाय करेंट अफेयर्स या टॉपर इंटरव्यू देखें।
3. ब्रेक के समय का इस्तेमाल करें: कॉलेज ब्रेक या ट्रैवल टाइम में छोटे टॉपिक जैसे NCERT के सारांश या करेंट नोट्स पढ़ें।
4. वीकेंड का फुल उपयोग करें: शनिवार-रविवार को लंबे स्टडी सेशन रखें और पूरे हफ्ते के पढ़े टॉपिक्स को रिवाइज़ करें।
5. मनोरंजन समय: हर 1 से 2 सप्ताह में एक मूवी जरूर देखें और उस दिन बस पढ़े हुए टॉपिक को रिवाइज करें।
ग्रेजुएशन में कौन सा सब्जेक्ट लेना चाहिए? (Best Graduation Subjects for UPSC Aspirants)
UPSC की तैयारी के साथ ग्रेजुएशन में सही विषय चुनना बहुत जरूरी होता है क्योंकि इससे बेस तैयार करने में काफी मदद मिलती है। आइए जानते हैं, किस सब्जेक्ट को पढ़ने से क्या फायदा है:
- यदि आप History लेते हैं तो यह आपको भारतीय इतिहास, संस्कृति और आर्ट एंड कल्चर को समझने में मदद करेगा।
- Geography विषय प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण और भूगोल से जुड़े प्रश्नों में सहायता करता है।
- Political Science (Polity) भारतीय संविधान और प्रशासन को समझने में उपयोगी है।
- Economics विषय अर्थव्यवस्था, बजट और नीतियों को समझने में मदद करता है।
- अगर आप Sociology या Public Administration चुनते हैं तो यह समाज और शासन व्यवस्था से जुड़ी अवधारणाओं को समझने में आसान बनाता है, जो UPSC के GS पेपर और इंटरव्यू दोनों में बहुत लाभकारी है।
7. ऐसे टॉपर जिन्होंने ग्रेजुएशन के बाद ही UPSC क्लियर किए हैं? (UPSC Toppers Who Started Preparation in College)
कई ऐसे टॉपर देखने को मिलते हैं जो ग्रेजुएशन के बाद ही इस एग्जाम को क्लियर करते हैं जिससे देशभर में वह एक चर्चा का विषय बन जाते हैं। जैसे दिव्या तंवर मैम जिन्होने मात्र 21 साल में ही इस एग्जाम को क्लियर कर दिखाया। इसी तरह अंकिता जैन, श्रुति शर्मा जैसे कई टॉपर ने कम ऐज में इस एग्जाम को क्लियर कर युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। ग्रेजुएशन के बाद ही UPSC में सफलता पाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उम्मीदवार के पास और अधिक उच्च पदों तक पहुंचने के लिए लंबा करियर समय मिलता है।
UPSC की तैयारी में यूनिवर्सिटी या कॉलेज का योगदान क्या है? (Role of College in UPSC Preparation)
यूनिवर्सिटी या कॉलेज में पढ़ने के दौरान हर एक स्टूडेंट्स को नई नई चीजें सिखने को हमेशा मिलती हैं। सीनियर के अनुभवों को जानना, लाइफस्टाइल में परिवर्तन आदि भी सीखने को मिलता जो निम्न हैं:
- लेखन शैली में सुधार: कॉलेज में असाइनमेंट, प्रोजेक्ट और निबंध लिखने से आपकी लिखने की आदत विकसित होती है, जो UPSC के Mains पेपर में बहुत ही मदद करती है।
- बोलचाल और प्रस्तुति कौशल: सेमिनार, ग्रुप डिस्कशन और डिबेट में भाग लेने से आपकी कम्युनिकेशन स्किल और आत्मविश्वास बढ़ता है, जो इंटरव्यू के लिए ज़रूरी है।
- बेसिक नॉलेज का विकास: ग्रेजुएशन के दौरान चुना गया विषय (History, Polity, Economics आदि) UPSC के GS पेपर और वैकल्पिक विषय के लिए मजबूत नींव तैयार करता है।
- मार्गदर्शन: कॉलेज के टीचर्स और सीनियर्स से सही गाइडेंस और उनके अनुभव से सीखने का मौका मिलता है, जिससे तैयारी की दिशा और अधिक स्पष्ट होती है।
- समय प्रबंधन और अनुशासन: यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के दौरान अन्य कार्यों के प्रति आप टाइम मैनेजमेंट सीखते हैं जो UPSC तैयारी में सबसे अहम भूमिका है।
निष्कर्ष
ग्रेजुएशन के साथ ही UPSC की तैयारी करना न सिर्फ समझदारी का काम है बल्कि सफलता की नींव को भी मजबूत करता है। इससे आप अपने सिलेबस को अच्छे से समझकर उसके अनुसार तैयारी बहुत ही कम समय में कर सकते हैं और डिग्री पूरा होते होते सफलता की प्राप्ति भी कर सकते हैं। अगर, आपका लक्ष्य सिविल सेवा में जाना है तो ग्रेजुएशन के दौरान ही तैयारी करना अपने सपने को हकीकत में बदलने का पहला सही कदम हो सकता है।
इस ब्लॉग को लेकर आपके मन में किसी भी तरह का डाउट है तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं और UPSC से सम्बंधित ऐसे ही जानकारी लेने के लिए sdreserchworld.in के साथ जुड़े रहें।